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माता वैष्णों देवी Vaishno devi

मात्र 1500 रुपए में, 3 दिनों की माता वैष्णों देवी की यात्रा कैसे करें? [ नवरात्रि स्पेशल ]


जय माता दी दोस्तों... नवरात्रि के इन पावन दिनों में बहुत से श्रद्धालु माता वैष्णों देवी की यात्रा पर जाने का सोच रहे होंगे, तो सोचा क्यों न उनकी सहायता एवं जानकारी के लिए एक अच्छा सा पोस्ट लिख दूं। इस पोस्ट में, मैं सारी जानकारी एवं खर्चे इत्यादि 1 व्यक्ति के अनुसार बताऊंगा, लेकिन यदि आप ज्यादा लोग जा रहे हैं तो कुल खर्च उसी अकॉर्डिंग बढ़ जाएगा। तो चलिए शुरू करते हैं....


माता वैष्णों देवी की यात्रा पर जाने से जितने दिन पहले हो सके, आपको अपने लिए कटरा में स्थित यात्री निवासों में डोरमेट्री बुक करनी है और काफी डिमांड होने की वजह से आपको पहले से बुक करना अनिवार्य है और साथ ही साथ आप अपने RFID कार्ड के लिए भी अप्लाई कर दें। इसके लिए आपको सबसे पहले, अपने फोन का इस्तेमाल करते हुए श्री माता वैष्णों देवी श्राइन बोर्ड की वेबसाइट पर जाना है जो कि maavaishnodevi .org है, यहां फिर आपको मेन्यू ओपन करके Online Services पर क्लिक करना है।


फिर आपको अपना मोबाइल नंबर और OTP डालकर, लॉगिन करने का ऑप्शन मिल जाएगा, तो फटाफट से लॉगिन कर लीजिए और फिर my profile में जाकर, अपनी बेसिक डिटेल्स भर दीजिए।


लॉगिन करते ही आपको डैशबोर्ड पर ही Accomodation का ऑप्शन मिल जाएगा उसपे क्लिक करो और फिर Location में कटरा और Accomodation Type में डोरमेट्री सेलेक्ट करो, चूंकि डोरमेट्री तो अर्धकुंवारी, सांझीछत, और भवन पर भी हैं लेकिन जो प्लान आगे मैं बताऊंगा, उसके अनुसार आपको कटरा में ही स्टे करना चाहिए और अक्सर आपको माता के भवन और अर्धकुंवारी पर डोरमेट्री अवेलेबल मिलने के चांसेज कम होंगे, क्योंकि श्रद्धालुओं की भीड़ पहले से ही ऑनलाइन बुकिंग कर लेती है तो बेहतर है आप कटरा में रुक जाएं और कम खर्च में आपका काम बन जाएगा।


इसके बाद आपको Checkin date सेलेक्ट करनी है तो जैसे ही आप उस ऑप्शन पर क्लिक करेंगे, वहां कैलेंडर खुल जाएगा और जिस तारीख पर कटरा में स्थित यात्री निवासों में डोरमेट्री अवेलेबल है वो तारीख आपको Green कलर में शो होगी, और जिस तारीख में सब फुल हो चुका है वो red कलर में शो होगी। तो आप उसी अकॉर्डिंग जिस तारीख को कटरा में डोरमेट्री अवेलेबल हो उस दिन आप डोरमेट्री बुक कर लें, डेट सेलेक्ट करने के बाद, आपको कटरा में स्थित यात्री निवासों आशीर्वाद भवन और त्रिकुटा भवन में जितने डोरमेट्री अवेलेबल हैं उनके ऑप्शन दिख जाएंगे, चूंकि वहां मौसम ठंडा रहता है तो आप Non AC डॉरमेट्री सेलेक्ट कर लें जो कि आपको 150 रूपये का पड़ेगा एक रात के लिए, checkin टाइम सुबह 10 बजे से रहता है और अगले दिन सुबह 10 बजे तक आपको check-out करना होगा।


तो आगे आप अपनी डिटेल्स जैसे कितने बेड चाहिए, नाम, नंबर, ID Proof में आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि भरके, ऑनलाइन पेमेंट करके डोरमेट्री बुक कर सकते हैं।


इसके बाद आपको उसी डेट पर अपने लिए RFID कार्ड अप्लाई कर देना है जो कि आपको आराम से मिल जाएगा। डैशबोर्ड में ही यात्रा पर्ची वाले सेक्शन में जाकर, अपने लिए यात्रा का रजिस्ट्रेशन करना है जिसका कन्फर्मेशन आपको मोबाइल पर मिल जाएगा, फिर जब आप कटरा पहुंच जायेंगे तो RFID रजिस्ट्रेशन काउंटर से आपको यात्रा पर्ची का कन्फर्मेशन दिखाकर RFID कार्ड मिल जाएगा। यात्रा पर्ची के लिए भी आपको अपनी बेसिक डिटेल्स और ID Proof इत्यादि देना होगा जिसके लिए आपको अपने आधार कार्ड, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस इत्यादि का नंबर डालना पड़ सकता है।


Day 0:


भले ही आप किसी भी राज्य या शहर से हों, आप अपने शहर से सीधा कटरा के लिए ट्रेन पकड़ सकते हैं और यदि आपके शहर से कटरा के लिए कोई ट्रेन नहीं है, तो आप सीधा दिल्ली आ जाओ और दिल्ली से ही हम इस यात्रा की शुरुआत करते हैं। 


आपने जिस तारीख पर अपने लिए डोरमेट्री और यात्रा पर्ची बुक की है, आपको उस दिन सुबह में कटरा पहुंचना है। तो उसके ठीक एक दिन पहले रात में आपको, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 15 से प्रतिदिन रात 8:50 PM पर चलने वाली 12445 उत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन पकड़नी है जिसका जनरल टिकट मात्र 200 रुपए का मिलेगा, चूंकि यह ट्रेन नई दिल्ली से बनके चलती है तो आप समय से थोड़ा पहले पहुंच कर अपने लिए सीट घेर सकते हैं।


पानीपत, अंबाला कैंट, लुधियाना और पठानकोट होते हुए, यह ट्रेन अगले दिन सुबह 8 बजे श्री माता वैष्णों देवी कटरा पहुंच जाएगी जिस दिन के लिए आपने डोरमेट्री एवं यात्रा पर्ची बुक की है। ध्यान रहे, कटरा पहुंचने से पहले ही, स्लीपर कोच में जाकर साफ सुथरा वॉशरूम देखकर फ्रेश हो जाओ। लगभग जम्मू पहुंचते ही आधी ट्रेन खाली हो जाएगी और आप स्लीपर के किसी भी कोच में जाकर फ्रेश हो सकते हैं और आप सुबह 8 बजे तक कटरा पहुंच जायेंगे।


Day 1:


कटरा पहुंचते ही रेलवे स्टेशन पर स्थित काउंटर पर जाकर अपनी यात्रा पर्ची दिखाकर, अपने लिए RFID कार्ड बनवा लें जिसमें भीड़ के अनुसार मुश्किल से आधे घंटे का समय लगेगा। यदि आप रेलवे स्टेशन पर ही इसको बनवा लेते हैं तो ज्यादा बेहतर रहेगा, आगे आपका समय बचेगा, नहीं तो अगर स्टेशन पर भीड़ ज्यादा है तो RFID कार्ड के लिए काउंटर आपको बस स्टैंड, निहारिका कॉम्प्लेक्स और बाण गंगा के पास भी मिल जायेंगे।


रेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही, आप लगभग 20 मिनट की पैदल यात्रा करके कटरा बस स्टैंड चौक पहुंच जाइए, यदि रेलवे स्टेशन पर RFID कार्ड नहीं बनवा पाते हैं भीड़ की वजह से तो बस स्टैंड पर स्थित यात्रा पर्ची काउंटर से बनवा सकते हैं। उसी चौक पर सीधे हाथ की तरफ कटरा का मेन बाजार शुरू होता है और वहीं चौक पर ही बस स्टैंड से पहले JK Tourism Corporation Ltd का बोर्ड लगा दिखेगा, वहीं अंदर जाओ और वहां पर आपको लॉकर रूम मिल जाएगा, जहां आप अपना एक्स्ट्रा लगेज रख सकते हैं, यहां प्रति बैग पर 20 रुपए लगते हैं 24 घंटे बैग रखने के, तो आप वहां अपना एक्स्ट्रा लगेज रख देना है और पर्ची लेकर बाहर आ जाना, आपको जो भी कपड़े, सामान इत्यादि की जरूरत पड़े वो आप एक शोल्डर बैग में रख सकते हैं और शोल्डर बैग लेकर अपनी पैदल यात्रा शुरू कर सकते हैं।


लगेज जमा करने के बाद बाहर निकल कर आपको काफी रेस्टोरेंट , स्टॉल इत्यादि मिल जायेंगे, जहां आप 50 रुपए में आराम से सुबह का चाय नाश्ता कर सकते हैं। पैदल यात्रा शुरू करने के लिए, उसी चौक से आपको ऑटो लेकर बाण गंगा चैक प्वाइंट पर पहुंचना होगा जो कि लगभग 3 किलोमीटर दूर है तो इसमें आपके लगभग 50 रुपए खर्च होंगे। सुबह के लगभग 10-11 बजे तक, आप बाण गंगा चैक प्वाइंट पहुंच जाइए, वहां आपका RFID कार्ड चैक होगा और आपको श्री माता वैष्णों देवी के भवन तक पहुंचने के लिए पैदल मार्ग पर एंट्री मिल जाएगी।


आगे का प्लान यह है कि आप उसी दिन रात 9 - 10 बजे तक दर्शन करके वापस कटरा आ जाइए और जिस यात्री निवास में अपने लिए डोरमेट्री बुक करी है वहां जाकर रात भर आराम करिए। आपको पूरी पैदल यात्रा के दौरान लगभग 12 घंटे मिलेंगे और इतना समय पैदल यात्रा करके दर्शन करके वापस आने के लिए पर्याप्त है।


तो बाण गंगा चैक प्वाइंट से एंट्री लेने के बाद अपनी पैदल यात्रा शुरू करिए, एंट्री लेते ही आपको कई घोड़े, खच्चर एवं पालकी इत्यादि वाले मिल जाएंगे जहां आप श्राइन बोर्ड द्वारा निर्धारित मूल्यों पर अपने या अपने परिजन के लिए घोड़ा, खच्चर, पालकी इत्यादि ले सकते हैं। हालांकि इस प्लान के मुताबिक, आपको पैदल ही यात्रा करनी है।


यहां से अर्धकुंवारी तक के लिए दो मार्ग गये हैं, एक ताराकोटे मार्ग और दूसरा जो पुराना ट्रेडिशनल मार्ग है वो। ताराकोटे मार्ग लगभग 8 किलोमीटर लंबा रास्ता है जिस पर घोड़े और खच्चर पूरी तरह से प्रतिबंधित हैं और यह रास्ता एक दम साफ सुथरा, पक्का और सीढ़ियों से रहित (रैंप जैसा) है, जिससे बुजुर्गों के लिए भी चढ़ाई आसान हो जाती है। हालांकि इस मार्ग से बहुत कम श्रद्धालु यात्रा करते हैं क्योंकि यह मार्ग पुराने ट्रेडीशनल मार्ग से थोड़ा लंबा पड़ता है और साथ ही साथ इस मार्ग पर कोई भी दुकानें इत्यादि नहीं है। बाण गंगा चैक प्वाइंट से थोड़ा आगे से बाएं हाथ पर इस मार्ग का प्रवेश द्वार पड़ता है।


वहीं दूसरे पुराने ट्रेडिशनल मार्ग पर आपको विभिन्न प्रकार की खाने पीने की दुकानें, प्रमुख मंदिर एवं सुविधाएं मिल जाएंगी जो कि अर्धकुंवारी तक लगभग 7 किलोमीटर लंबा है। इस मार्ग पर घोड़े खच्चर पालकी इत्यादि भी अन्य श्रद्धालुओं के साथ आते जाते हैं। तो आप भी इसी मार्ग से अपनी पैदल यात्रा शुरू करें।


मार्ग पर आगे चलकर आपको बाण गंगा मिलेगी जहां पर स्नान घाट बने हुए हैं। आप फटाफट बाण गंगा में स्नान करके तरोताजा हो जाइए और अपनी पैदल यात्रा जारी रखिए। कहा जाता है कि जब भैरव नाथ, माता वैष्णों देवी का पीछा कर रहा था तो इसी जगह पर जब हनुमान जी को प्यास लगी थी तो वैष्णों माता ने अपना बाण चलाकर यहीं पर गंगा जी की धारा प्रकट की थी ताकि हनुमान जी अपनी प्यास बुझा सकें। साथ ही साथ इसी जगह पर माता ने अपने केश यानि बाल भी धोए थे जिस वजह से इस जगह को बाल गंगा भी कहा जाता है।


बाण गंगा से अपनी पैदल यात्रा जारी रखते हुए जब आप आगे बढ़ेंगे तब पहले पड़ाव पर चरण पादुका मंदिर पड़ेगा, जब भैरव नाथ, माता वैष्णों देवी का पीछा कर रहा था तब इसी जगह पर माता ने भैरव नाथ को पीछे मुड़कर देखा था जिस वजह से आज भी माता के चरणों के निशान यहां मौजूद है और श्रद्धालु अपनी पैदल यात्रा के दौरान सबसे पहले यहां आकर चरण पादुका मंदिर में दर्शन करते हैं। तो आप भी यहां माता के चरण पादुकाओं के दर्शन करो और फिर अपनी पैदल यात्रा जारी रखो।


इस मार्ग पर आपको ढेरों खाने पीने की दुकानें, रेस्टोरेंट इत्यादि मिल जायेंगे, तो आपको जैसी भी जरूरत लगे आप खाते पीते, कुछ कुछ दूरी पर दुकानों के आगे लगी बेंचों पर बैठ कर आराम करते हुए अपनी पैदल यात्रा जारी रख सकते हैं। रास्ते पर आपको विभिन्न जगहों पर Public Toilet भी मिल जायेंगे, और यदि आप पूरी तरह फिट हैं और जल्दी अर्धकुंवारी तक पहुंचना चाहते हैं तो आपको बीच बीच में सीढ़ियां भी मिल जाएंगी जिनसे और जल्दी अर्धकुंवारी तक पहुंचा जा सकता है। तो कोशिश करें कि जितना जल्दी हो सके आप अर्धकुंवारी तक पहुंच जाएं, अर्धकुंवारी पर आपको श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित विभिन्न भोजनालय मिलेंगे जहां आप 40-50 रुपए में राजमा चावल, छोले चावल इत्यादि खाकर अपना दोपहर का लंच कर सकते हैं।


अब अर्धकुंवारी पर अर्धकुंवारी मंदिर एवं गुफा के दर्शन करिए। कहा जाता है कि इसी जगह पर स्थित गुफा में अपनी शक्तियाँ बढ़ाने के लिए माता वैष्णों देवी ने नौ महीनों तक छुपकर तपस्या की थी ताकि भैरव नाथ का वध कर सकें।


अर्धकुंवारी से माता वैष्णों देवी के मुख्य भवन तक पहुंचने के लिए 2 मार्ग गये हैं, एक हिमकोटी मार्ग जो कि लगभग 5.5 किलोमीटर लंबा है। अर्धकुंवारी से भवन जाने का यह सबसे सुगम और आधुनिक मार्ग है। इस रास्ते पर चढ़ाई कम है और बैटरी कारें इसी मार्ग पर चलती हैं। यहाँ घोड़ों की अनुमति नहीं है, इसलिए यह साफ-सुथरा मार्ग है। दूसरा है हाथी मत्था मार्ग, यह अर्धकुंवारी से भवन के बीच आने वाला वह पुराना और खड़ा (steep) चढ़ाई वाला रास्ता है, जिसकी आकृति हाथी के माथे जैसी ऊंची और तीखी चढ़ाई जैसी मानी जाती है।


हाथी मत्था मार्ग से जाने पर आगे सांझीछत हेलीपैड पड़ता है, हेलिकॉप्टर द्वारा आने वाले यात्रियों को इसी हेलीपैड पर उतारा जाता है और फिर यहां से लगभग 3 किलोमीटर की दूरी पर भवन है तो यात्रियों को यह 3 किलोमीटर पैदल ही कवर करने पड़ते हैं।


तो अर्धकुंवारी से आप अपनी पैदल यात्रा हिमकोटी मार्ग द्वारा जारी रखें और जय माता दी के नारे लगाते हुए माता के भवन तक पहुंचें। यहां आपको श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित प्रसाद की दुकानें मिल जाएंगी जहां से आप प्रसाद ले सकते हैं। इसके बाद माता वैष्णों देवी के दर्शन के लिए मंदिर तक जाने वाली लाइन में लग जाइए, यहां एक बार फिर से आपका RFID कार्ड चैक किया जाएगा और फिर आप माता के मंदिर तक जा सकते हैं। तो माता वैष्णों देवी के मंदिर पहुंच कर माता के पिण्डी रूप में दर्शन करिए, अपने खुशहाल जीवन की कामना करिए और फिर आगे भैरव मंदिर के लिए निकल जाइए।


सुबह लगभग 10 बजे शुरू करके, कोशिश करिए कि लगभग 3 बजे तक आप माता वैष्णों देवी के दर्शन कर लें, क्योंकि फिर आगे भैरव मंदिर जाने के लिए आप रोपवे ले सकते हैं। भवन से भैरव मंदिर तक के लिए रोपवे सुबह 8 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक चलती है। तो यदि आप 3 बजे तक भी माता के दर्शन कर लेते हैं तो आप रोपवे टिकट की लाइन में लगकर रोपवे से भैरव मंदिर तक जा सकते हैं। रोपवे द्वारा आपको 100 रूपये की टिकट लगेगी जिसमें भैरव मंदिर तक जाना और वापस भवन तक आना शामिल होगा।


तो रोपवे द्वारा भैरव मंदिर के दर्शन हो जाते हैं तो बहुत बढ़िया रहेगा, आपका समय और एनर्जी दोनों बचेगी, अन्यथा आपको 2 से 2.5 किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई करके भैरव मंदिर तक जाना होगा। कहा जाता है कि माता वैष्णों देवी ने जब भवन पर भैरव नाथ का सर काट कर वध किया था तो भैरव नाथ का सर जहां गिरा था वहां आज भैरव मंदिर बना है। मृत्यु के निकट आने पर भैरवनाथ को अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने पश्चाताप करते हुए 'मां-मां' पुकारा। करुणाशील माता ने उसे माफ कर दिया और एक वरदान दिया।


माता ने वरदान दिया कि जो भक्त उनके दर्शन के बाद भैरवनाथ के दर्शन नहीं करेगा, उसकी वैष्णो देवी की यात्रा अधूरी मानी जाएगी। इसी मान्यता के अनुसार आज भी भक्त माता के दर्शन के बाद भैरव मंदिर के दर्शन करने जाते हैं।


तो बेहतर रहेगा अगर आप समय से रोपवे द्वारा भैरव मंदिर तक पहुंच जाते हैं। मुश्किल से 5 मिनट के अंदर आप भैरव घाटी पहुंच जायेंगे, रोपवे से बाहर निकलते ही कुछ ही कदम की दूरी पर भैरव मंदिर मिलेगा, तो फटाफट से भैरव मंदिर में दर्शन करें और फिर कुछ देर भैरव मंदिर के सामने वाली छत पर बैठ कर आसपास के पहाड़ों के खूबसूरत दृश्यों का आनंद लें। कुछ देर वहां रूक कर, फोटो वीडियो इत्यादि बनाने के बाद, तुरंत समय रहते वापस रोपवे द्वारा भवन आ जाइए।


भवन पर आने के बाद, अपने समय अनुसार वापस कटरा के लिए पैदल यात्रा शुरू करें। इस बार आपको सिर्फ़ और सिर्फ़ नीचे ही उतरना है तो कुछ दूर आप समतल रास्ते पर चलें और जब लगे कि थकान कम है तो आप सीढ़ियों से भी नीचे उतर सकते हैं। सीढ़ियों द्वारा उतरने पर आप और जल्दी नीचे पहुंचेंगे, हालांकि सीढ़ियों द्वारा थोड़ा आराम से ही नीचे उतरना, क्योंकि उतरते वक्त घुटनों के ज्वाइंट पर ज्यादा असर पड़ता है जिसका परिणाम आपको बाद में देखने को मिलेगा जब घुटने दर्द करेंगे। 😅


तो आप अपनी सुविधानुसार नीचे उतरना शुरू करें, और अर्धकुंवारी पहुंच कर फिर से समय से भोजन कर लें, आराम से आप 50-100 रुपए में भरपेट खाना खा लेंगे। अब पूरी एनर्जी के साथ कटरा के लिए नीचे उतरना जारी रखें और आप अगले 3 घंटे में या उससे पहले आराम से वापस बाण गंगा चैक पोस्ट पर पहुंच सकते हैं।


अब बाण गंगा चैक प्वाइंट पहुंच कर बाहर निकलिए और जिस यात्री निवास में आपने डोरमेट्री बेड बुक किया है वहां जाने के लिए शेयरिंग ऑटो ले लीजिए, बाण गंगा चैक पोस्ट पर आपको काफी सारे ऑटो वाले मिल जाएंगे, शेयरिंग में बात करिए और लगभग 100 रूपये में वो आपको त्रिकुटा भवन या आशीर्वाद भवन जहां आपकी बुकिंग है वहां छोड़ देंगे। रात का समय होगा तो 100 से कम में मुश्किल से ही जायेंगे वो, फिर भी अपने अकॉर्डिंग बार्गेनिंग करके देख लेना।


यात्री निवास पहुंच कर, कन्फर्मेशन ईमेल या बुकिंग दिखाकर फटाफट से checkin करिए और अगले दिन सुबह 10 बजे तक आराम करिए, अभी तक की यात्रा की सारी थकान निकालिए।


अभी तक यात्रा के दौरान आपके कुल 700 रूपये तक खर्च होंगे।


Day 2:


अब दूसरे दिन आपके पास 3 ऑप्शंस हैं:


Option 1. निश्चित रूप से हो सकता है सुबह तक भी आपकी थकान ना निकले, कुछ घंटे और आराम करने का आपका मन हो, तो आप अपने यात्री निवास में काउंटर पर जाकर एक एकस्ट्रा दिन का स्टे ले सकते हैं और दोबारा 150 रूपये देकर अपना स्टे कंटिन्यू कर सकते हैं। अक्सर कटरा के यात्री निवासों में उतनी भीड़ नहीं रहती तो आपको आराम से अगले दिन भी स्टे मिल जाएगा।


पूरे दिन जितना मन करे आराम करो, और शाम को 5 बजे के आसपास मार्केट घूमने निकल जाओ, शॉपिंग इत्यादि करो और रात का खाना कटरा मार्किट में खा कर वापस अपने यात्री निवास में आ जाओ, कटरा मार्किट मुश्किल से 10 मिनट की पैदल दूरी पर होगी।


फिर रात में स्टे करो, सारी बची कूची थकान निकालो और अगले दिन सुबह 8:35 AM पर कटरा रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर 5 से चलने वाली 12920 Malwa SF Express ट्रेन पकड़ लो जो कि रात 8:15 PM पर नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंच जाएगी।


Option 2. Day 2 में सुबह 10 बजे डोरमेट्री से चेकआउट करदो और पैदल पैदल 15 मिनट की दूरी पर स्थित बस स्टैंड जाकर अपना लगेज लो और मार्केट में खाना इत्यादि खाने एवं जरूरत अनुसार खरीदारी करने के बाद रेलवे स्टेशन आ जाओ और दोपहर 3:15 PM पर प्लेटफार्म नंबर 5 से 20434 Jammu Mail ट्रेन पकड़ लो जो कि अगले दिन सुबह 4-5 AM बजे पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशन उतार देगी।


Option 3. Day 2 में अपने यात्री निवास में काउंटर पर जाकर एक एकस्ट्रा दिन का स्टे ले सकते हैं और दोबारा 150 रूपये देकर अपना स्टे कंटिन्यू कर सकते हैं। फिर आप शाम 5 बजे तक अपनी थकान निकालो और उसके बाद 5 बजे चेकआउट करके, पैदल पैदल बस स्टैंड पहुंच जाओ, वहां से अपना लगेज लो जो आपने लॉकर रूम में जमा किया था, कुछ देर जरूरत अनुसार खरीदारी एवं खाना पीना करके वापस कटरा रेलवे स्टेशन पहुंच जाओ।


और रात 7:50 PM पर प्लेटफार्म नंबर 3 से 12446 उत्तर संपर्क क्रांति एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ लो जो कि आपको अगले दिन सुबह 7 बजे नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पहुंचा देगी।


तीनों ही ऑप्शंस में आपके ट्रेन में 200 रूपये टिकट, 150 खाना इत्यादि में खर्च होंगे और स्टे लेते हैं तो 150 उसके।


मेरी समझ से option 3 ज्यादा सही रहेगा।


कुल मिलाकर आप 1500 तक में पूरी यात्रा कर लेंगे।

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