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BHUTAN TOUR ભૂતાન

   #भूटान आज मैं सिर्फ 700 रुपये  मे दिल्ली से अपने पड़ोसी देश भूटान  मे 1 दिन घूमने का का सफर बता रहा हूँ  वो भी कानूनी तरीके से,जिसका अनुभव आप कभी नहीं भूल पाओगे, सबसे पहली बात  भूटान ने🇧🇹🇧🇹 पूरे 2 साल तक किसी भी देश के यात्रियों की एंट्री पर रोक लगा रखी थी, लेकिन अब नये नियमों के साथ  हम लोग भी प्रवेश कर सकते हैं, भूटान जाने के लिए आप दिल्ली से महानंदा express(15484)  हासीमारा  तक का टिकट कराइये जिसका स्लीपर birth का चार्ज 660 रुपये है हासीमारा अलीपुर द्वार जिले का एक छोटा सा station है अगर आप रात मे पहुँचते है तो station मे ही aramdayak बैठेने की सुविधा है, हासीमारा station से आपको जयगांव border पहुंचना होगा, जो की भारत और भूटान का border है, जो की station से 14km है और sharing मे आप ऑटो से  40 से 50 रुपये मे पहुँच जाओगे,   एक ऑटोwale का नंबर(7430803467) नाम( लामा )दे रहा हूँ usse आप पूछ के जा सकते हैं, अगर कोई   जयगाँव बोर्डर मे रुकना चाहे तो सिर्फ 100 रुपये मे श्री हनुमान मंदिर धर्मशाला मे रुक सकता है जो की ...

GMVN Garhwal Mandal Vikas Nigam Ltd

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  G arhwal Mandal Vikas Nigam Ltd अगर उत्तराखंड घूमने की प्लानिंग है तो अब खाने, पीने और ठहरने की कोई समस्या नहीं होगी।  GMVN गढ़वाल मंडल विकास निगम के होटलों में ठहरने के लिए पर्यटक इस्तेमाल कर सकते हैं। उत्तराखंड के गढ़वाल में हर पर्यटक स्थल पर जीएमवीएन के होटल आसानी से मिल जाते हैं।  चारों धाम में जीएमवीएन के होटल हैं। The Vision of GMVN is to promote steady and sustained growth phase of the travel and tourism sector in Uttarakhand making the destinations more accessible, more attractive with many facilities and amenities for the tourists worldwide. GMVN Website Link Email :-   gmvn@gmvnl.in gmvn@sancharnet.in yatraofficegmvn@gmail.com Contact Dehradun (Head Office) 91-135-2746817 91-135-2749308 91-135-2748478 91-135-2746847 Rishikesh (Yatra Office) 91-135-2431793 91-135-2431783 91-135-2431749 91-135-2430372 पर्यटक स्थलों में अब ठहरने की नहीं रहेगी टेंशन अब मेकमाय ट्रिप से भी गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के होटल बुक कराए जा सकते हैं।  गढ़वाल मंडल विकास न...

dudhsagar waterfall goa દૂધ સાગર વોટર ફોલ ગોવા

  दूधसागर वॉटरफॉल ( Must visit place if your are going Goa) दूधसागर वॉटरफॉल अपने आकर्षक जल के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। पहाड़ के ऊपर से गिरने वाली मांडवी नदी का जल ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह जल नहीं ऊपर से दूध की नदी बह रही हो। पर्यटक घंटों इसके सफेद फटे पानी को निहारते रहते हैं। आप भी जरूर आएं और इस खूबसूरत पर्यटन स्थल का लुत्फ उठाएं। ट्रेन से दूधसागर वॉटरफॉल कैसे पहुंचे  यदि आप ट्रेन के माध्यम से अपनी दूधसागर वॉटरफॉल की यात्रा करना चाहते है तो हम आपको बता दें कि दूधसागर रेल्वे स्टेशन पर ज्यादा ट्रेन नही रूकती हैं। आपको जिस स्टेशन की आवश्यकता है उसे कुलेम कहा जाता है, झरना इस स्टेशन के बगल में स्थित है,( दूधसागर वॉटरफॉल से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी)  और आपको वास्को डी गामा में या मडगांव में मडगांव स्टेशन पर ट्रेन पर चढ़ना होगा। इस रूट पर दिन में कई बार (इलेक्ट्रिक ट्रेन की तरह) फ्रीक्वेंसी वाली ट्रेन चलती है। कुलेम से मडगांव के लिए आखिरी ट्रेन 17:00 बजे निकलती है। ट्रेन का किराया सस्ता है और प्रति टिकट 50 रुपये से अधिक नहीं है। 07342 passenger ट्रेन, वास्को ड़ी गामा से...

ममलेश्वर महादेव મંડી મનાલી

  ममलेश्वर महादेव मंदिर हिमाचल के बारे मैं आप सभी को बताना चाहता हू। आप सभी ने महाभारत देखी है उस मे एक प्रषंग आता है जिस मैं  पाडव एक परिवार के घर मैं  गांव मैं रहते थे और  ओर एक दिन उस परिवार के एक सदस्य को वहाँ के एक राक्षस के पास भोजन बनकर ओर भोजन लेकर जाना होता है  तो भीम उस परिवार के सदस्य की जगह  जाता है और राक्षस को बुलाने के लिए डोल बजाता हैं और राक्षस के आने पर उस को भीम मारदेता है  ।  इस इस्थान पर ही ममलेश्वर महादेव का मंदिर है। यह बिल्कुल सच है कि हिमालय की गोद में बसें ममलेश्वर महादेव के मंदिर में पांडवों के दौर का पांच हजार साल पुराना 200 ग्राम गेंहू का दाना और भीम का ढोल है। इसे यहां स‌दियों से सहेजकर रखा गया है। ‌ 200 ग्राम का गेंहू का दाना महाभारत काल है। देवभू‌मि हिमाचल के करसोग जिला ‌में स्थित ममलेश्वर महादेव के मंदिर में इसे आज भी सहेजकर रखा गया है।  मान्यता है कि यह गेंहू का दाना पांडवों ने उगाया था। उसी समय से इसे यहां रखा गया है। हिमाचल के मंडी जिले की करसोग घाटी के ममलेग गांव में स्थित मंदिर में रखा यह गेंहू का दाना कर...

कम बजट में कैसे घुमा जाये..

  बहुत से घुमक्कडों का प्रश्न होता है कि वो कम बजट में हिमाचल या दूसरी जगह कैसे घूमे । हर किसी का सपना होता है कि वो घूमने जाये लेकिन सभी की परिस्थितिया एक जैसी नही होती है । इस लेख के द्वारा आपको कुछ राय देना चाहता है जिससे आप कम बजट में यात्रा कर सकते है । 1.अपनी यात्रा हमेशा सितंबर,अक्टूबर और नवम्बर (दीवाली से पहले) महीने में करे । इस समय पर्यटक स्थल में भीड़ नही होती है । 2. यात्रा में कम से कम 2 जने हो, जिससे आपके रहने और खाने का खर्च आधा हो जायेगा । जैसे किसी धर्मशाला का किराया Rs 500 है अगर कोई अकेला है तब भी Rs 500 लगेगा  और 2 व्यक्ति होंगे तो वो 2 जनों में बंट जायेगा । 3. अपनी यात्रा अधिकतम भारतीय रेल के सामान्य श्रेणी और शयन श्रेणी से करे । हर पर्यटक स्थल के आस-पास एक छोटा या बड़ा रेलवे स्टेशन होता है । रेल की यात्रा बहुत सस्ती होती है । रेल में जितनी अधिक दूरी होती है किराया कम होता जाता है ।  4. जहां रेल सुविधा नही है उसके पास के रेलवे स्टेशन तक रेल तक यात्रा करे और उसके आगे की यात्रा बस से करे । जैसे धर्मशाला हिमाचल में रेलवे स्टेशन नही है लेकिन उसके पास कांगड़ा...

कैंपिंग Camping Tour

  Camping Tour के दौरान कुछ कैंपिंग एसेसरीज के बारे में जो अगर हम इस्तेमाल करे तो निश्चित ही हमारी यात्रा को क्रिएटिव और रोमाचकारी बनाते हैं, जो निम्न हैं 👇 स्लीपिंग टेंट, स्लीपिंग बैग  और कुकिंग के लिए पोर्टेबल स्टोव, "स्लीपिंग टेंट" जब आप यात्रा पर हो तो कुछ जगह इतना सुकून और शानदार लोकेशन होती है की आप वन्ही रुक जाना चाहते हैं, और ऐसे में अगर इस जगह अपना घर मिल जाएं तो फिर और क्या चाहिए, ऐसे में काम आता है स्लीपिंग टेंट,मार्केट में बहुत तरीके के टेंट अवेलेबल है,जिसमें 2 पर्सन  3 पर्सन और फैमिली के लिए 6 से 8 पर्सन वाला टेंट भी आता है,जैसे मैं सोलो यात्रा करता हूं मेरे पास जो टेंट है वह 3 पर्सन वाला ब्लैक & वाइट मॉडल है है,जो मैंने Decathlon देहरादून से लिया था,और ये मुझे 5500 का पड़ा था,इसमें एक ऑप्शन और आता है  2 पर्सन वाला है same मॉडल 4500 का पड़ता हैं, 2 पर्सन वाला मैं इसलिए रिकमेंड नहीं करूंगा क्योंकि एक तो उसकी हाइट थोड़ी मुझे कम लगी,ओर जगह भी कम लगी, 3 पर्सन वाले मे आप आराम से 2 लोग लेट सकते हो ओर सामान भी रख सकते हो, इसमें दो लेयर होती है एक आप जैसे अ...

मायरा की गुफा मेवाड़ Rajsthan મેવાડ રાજસ્થાન

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  मेवाड़ी इतिहास को और उस से जुड़ी धरोहरों को जानने की जब बात आती है तो अधिकांशतः सभी के मन मे उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़ आदि प्रसिद्ध स्थानों का ही ख्याल आता है। लेकिन हकीकत में इन प्रसिद्ध स्थानों के अलावा भी यहां मेवाड़ी इतिहास से जुड़ी इतनी विरासतें हैं जिनमें से अधिकतर के बारे में स्थानीय लोगों को भी जानकारी नही होती है। ऐसा ही एक स्थान है मायरा की गुफा... मायरा की गुफा वह स्थान है जहां महाराणा प्रताप ने मुगलों के साथ युद्ध के बाद अपना जीवन गुज़ारा था।  महाराणा प्रताप ने मेवाड़ की आज़ादी तक जंगलों में रहने की प्रतिज्ञा के बाद मेवाड़ में अनेकों स्थानों पर अपना ठिकाना बनाया था। उन्हीं स्थानों में से अपने शेष जीवन का अधिकांश समय यहीं व्यतीत किया था। यहीं पर महाराणा ने घास की रोटियां खाई थी और यहीं पर गुफा के एक हिस्से को अपना शस्त्रागार बनाया था। यह गुफा उदयपुर से तकरीबन 42 किमी दूर गोगुन्दा से 8 किमी दूर हल्दीघाटी(लोसिंग) मार्ग पर ढुलावतों का गुड़ा के पास अरावली की खूबसूरत पहाडियो में स्थित है। यहां जाने के लिए लगभग 4 किमी तक पैदल चलना पड़ता है। यह गुफा एकदम छद्म परिवेश में स्थित है...