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Showing posts from February, 2026

BHUTAN TOUR ભૂતાન

   #भूटान आज मैं सिर्फ 700 रुपये  मे दिल्ली से अपने पड़ोसी देश भूटान  मे 1 दिन घूमने का का सफर बता रहा हूँ  वो भी कानूनी तरीके से,जिसका अनुभव आप कभी नहीं भूल पाओगे, सबसे पहली बात  भूटान ने🇧🇹🇧🇹 पूरे 2 साल तक किसी भी देश के यात्रियों की एंट्री पर रोक लगा रखी थी, लेकिन अब नये नियमों के साथ  हम लोग भी प्रवेश कर सकते हैं, भूटान जाने के लिए आप दिल्ली से महानंदा express(15484)  हासीमारा  तक का टिकट कराइये जिसका स्लीपर birth का चार्ज 660 रुपये है हासीमारा अलीपुर द्वार जिले का एक छोटा सा station है अगर आप रात मे पहुँचते है तो station मे ही aramdayak बैठेने की सुविधा है, हासीमारा station से आपको जयगांव border पहुंचना होगा, जो की भारत और भूटान का border है, जो की station से 14km है और sharing मे आप ऑटो से  40 से 50 रुपये मे पहुँच जाओगे,   एक ऑटोwale का नंबर(7430803467) नाम( लामा )दे रहा हूँ usse आप पूछ के जा सकते हैं, अगर कोई   जयगाँव बोर्डर मे रुकना चाहे तो सिर्फ 100 रुपये मे श्री हनुमान मंदिर धर्मशाला मे रुक सकता है जो की ...

GMVN Garhwal Mandal Vikas Nigam Ltd

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  G arhwal Mandal Vikas Nigam Ltd अगर उत्तराखंड घूमने की प्लानिंग है तो अब खाने, पीने और ठहरने की कोई समस्या नहीं होगी।  GMVN गढ़वाल मंडल विकास निगम के होटलों में ठहरने के लिए पर्यटक इस्तेमाल कर सकते हैं। उत्तराखंड के गढ़वाल में हर पर्यटक स्थल पर जीएमवीएन के होटल आसानी से मिल जाते हैं।  चारों धाम में जीएमवीएन के होटल हैं। The Vision of GMVN is to promote steady and sustained growth phase of the travel and tourism sector in Uttarakhand making the destinations more accessible, more attractive with many facilities and amenities for the tourists worldwide. GMVN Website Link Email :-   gmvn@gmvnl.in gmvn@sancharnet.in yatraofficegmvn@gmail.com Contact Dehradun (Head Office) 91-135-2746817 91-135-2749308 91-135-2748478 91-135-2746847 Rishikesh (Yatra Office) 91-135-2431793 91-135-2431783 91-135-2431749 91-135-2430372 पर्यटक स्थलों में अब ठहरने की नहीं रहेगी टेंशन अब मेकमाय ट्रिप से भी गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) के होटल बुक कराए जा सकते हैं।  गढ़वाल मंडल विकास न...

dudhsagar waterfall goa દૂધ સાગર વોટર ફોલ ગોવા

  दूधसागर वॉटरफॉल ( Must visit place if your are going Goa) दूधसागर वॉटरफॉल अपने आकर्षक जल के लिए विश्व भर में प्रसिद्ध है। पहाड़ के ऊपर से गिरने वाली मांडवी नदी का जल ऐसा प्रतीत होता है जैसे वह जल नहीं ऊपर से दूध की नदी बह रही हो। पर्यटक घंटों इसके सफेद फटे पानी को निहारते रहते हैं। आप भी जरूर आएं और इस खूबसूरत पर्यटन स्थल का लुत्फ उठाएं। ट्रेन से दूधसागर वॉटरफॉल कैसे पहुंचे  यदि आप ट्रेन के माध्यम से अपनी दूधसागर वॉटरफॉल की यात्रा करना चाहते है तो हम आपको बता दें कि दूधसागर रेल्वे स्टेशन पर ज्यादा ट्रेन नही रूकती हैं। आपको जिस स्टेशन की आवश्यकता है उसे कुलेम कहा जाता है, झरना इस स्टेशन के बगल में स्थित है,( दूधसागर वॉटरफॉल से लगभग 6 किलोमीटर की दूरी)  और आपको वास्को डी गामा में या मडगांव में मडगांव स्टेशन पर ट्रेन पर चढ़ना होगा। इस रूट पर दिन में कई बार (इलेक्ट्रिक ट्रेन की तरह) फ्रीक्वेंसी वाली ट्रेन चलती है। कुलेम से मडगांव के लिए आखिरी ट्रेन 17:00 बजे निकलती है। ट्रेन का किराया सस्ता है और प्रति टिकट 50 रुपये से अधिक नहीं है। 07342 passenger ट्रेन, वास्को ड़ी गामा से...

ममलेश्वर महादेव મંડી મનાલી

  ममलेश्वर महादेव मंदिर हिमाचल के बारे मैं आप सभी को बताना चाहता हू। आप सभी ने महाभारत देखी है उस मे एक प्रषंग आता है जिस मैं  पाडव एक परिवार के घर मैं  गांव मैं रहते थे और  ओर एक दिन उस परिवार के एक सदस्य को वहाँ के एक राक्षस के पास भोजन बनकर ओर भोजन लेकर जाना होता है  तो भीम उस परिवार के सदस्य की जगह  जाता है और राक्षस को बुलाने के लिए डोल बजाता हैं और राक्षस के आने पर उस को भीम मारदेता है  ।  इस इस्थान पर ही ममलेश्वर महादेव का मंदिर है। यह बिल्कुल सच है कि हिमालय की गोद में बसें ममलेश्वर महादेव के मंदिर में पांडवों के दौर का पांच हजार साल पुराना 200 ग्राम गेंहू का दाना और भीम का ढोल है। इसे यहां स‌दियों से सहेजकर रखा गया है। ‌ 200 ग्राम का गेंहू का दाना महाभारत काल है। देवभू‌मि हिमाचल के करसोग जिला ‌में स्थित ममलेश्वर महादेव के मंदिर में इसे आज भी सहेजकर रखा गया है।  मान्यता है कि यह गेंहू का दाना पांडवों ने उगाया था। उसी समय से इसे यहां रखा गया है। हिमाचल के मंडी जिले की करसोग घाटी के ममलेग गांव में स्थित मंदिर में रखा यह गेंहू का दाना कर...

कम बजट में कैसे घुमा जाये..

  बहुत से घुमक्कडों का प्रश्न होता है कि वो कम बजट में हिमाचल या दूसरी जगह कैसे घूमे । हर किसी का सपना होता है कि वो घूमने जाये लेकिन सभी की परिस्थितिया एक जैसी नही होती है । इस लेख के द्वारा आपको कुछ राय देना चाहता है जिससे आप कम बजट में यात्रा कर सकते है । 1.अपनी यात्रा हमेशा सितंबर,अक्टूबर और नवम्बर (दीवाली से पहले) महीने में करे । इस समय पर्यटक स्थल में भीड़ नही होती है । 2. यात्रा में कम से कम 2 जने हो, जिससे आपके रहने और खाने का खर्च आधा हो जायेगा । जैसे किसी धर्मशाला का किराया Rs 500 है अगर कोई अकेला है तब भी Rs 500 लगेगा  और 2 व्यक्ति होंगे तो वो 2 जनों में बंट जायेगा । 3. अपनी यात्रा अधिकतम भारतीय रेल के सामान्य श्रेणी और शयन श्रेणी से करे । हर पर्यटक स्थल के आस-पास एक छोटा या बड़ा रेलवे स्टेशन होता है । रेल की यात्रा बहुत सस्ती होती है । रेल में जितनी अधिक दूरी होती है किराया कम होता जाता है ।  4. जहां रेल सुविधा नही है उसके पास के रेलवे स्टेशन तक रेल तक यात्रा करे और उसके आगे की यात्रा बस से करे । जैसे धर्मशाला हिमाचल में रेलवे स्टेशन नही है लेकिन उसके पास कांगड़ा...

कैंपिंग Camping Tour

  Camping Tour के दौरान कुछ कैंपिंग एसेसरीज के बारे में जो अगर हम इस्तेमाल करे तो निश्चित ही हमारी यात्रा को क्रिएटिव और रोमाचकारी बनाते हैं, जो निम्न हैं 👇 स्लीपिंग टेंट, स्लीपिंग बैग  और कुकिंग के लिए पोर्टेबल स्टोव, "स्लीपिंग टेंट" जब आप यात्रा पर हो तो कुछ जगह इतना सुकून और शानदार लोकेशन होती है की आप वन्ही रुक जाना चाहते हैं, और ऐसे में अगर इस जगह अपना घर मिल जाएं तो फिर और क्या चाहिए, ऐसे में काम आता है स्लीपिंग टेंट,मार्केट में बहुत तरीके के टेंट अवेलेबल है,जिसमें 2 पर्सन  3 पर्सन और फैमिली के लिए 6 से 8 पर्सन वाला टेंट भी आता है,जैसे मैं सोलो यात्रा करता हूं मेरे पास जो टेंट है वह 3 पर्सन वाला ब्लैक & वाइट मॉडल है है,जो मैंने Decathlon देहरादून से लिया था,और ये मुझे 5500 का पड़ा था,इसमें एक ऑप्शन और आता है  2 पर्सन वाला है same मॉडल 4500 का पड़ता हैं, 2 पर्सन वाला मैं इसलिए रिकमेंड नहीं करूंगा क्योंकि एक तो उसकी हाइट थोड़ी मुझे कम लगी,ओर जगह भी कम लगी, 3 पर्सन वाले मे आप आराम से 2 लोग लेट सकते हो ओर सामान भी रख सकते हो, इसमें दो लेयर होती है एक आप जैसे अ...

मायरा की गुफा मेवाड़ Rajsthan મેવાડ રાજસ્થાન

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  मेवाड़ी इतिहास को और उस से जुड़ी धरोहरों को जानने की जब बात आती है तो अधिकांशतः सभी के मन मे उदयपुर, चित्तौड़गढ़, कुम्भलगढ़ आदि प्रसिद्ध स्थानों का ही ख्याल आता है। लेकिन हकीकत में इन प्रसिद्ध स्थानों के अलावा भी यहां मेवाड़ी इतिहास से जुड़ी इतनी विरासतें हैं जिनमें से अधिकतर के बारे में स्थानीय लोगों को भी जानकारी नही होती है। ऐसा ही एक स्थान है मायरा की गुफा... मायरा की गुफा वह स्थान है जहां महाराणा प्रताप ने मुगलों के साथ युद्ध के बाद अपना जीवन गुज़ारा था।  महाराणा प्रताप ने मेवाड़ की आज़ादी तक जंगलों में रहने की प्रतिज्ञा के बाद मेवाड़ में अनेकों स्थानों पर अपना ठिकाना बनाया था। उन्हीं स्थानों में से अपने शेष जीवन का अधिकांश समय यहीं व्यतीत किया था। यहीं पर महाराणा ने घास की रोटियां खाई थी और यहीं पर गुफा के एक हिस्से को अपना शस्त्रागार बनाया था। यह गुफा उदयपुर से तकरीबन 42 किमी दूर गोगुन्दा से 8 किमी दूर हल्दीघाटी(लोसिंग) मार्ग पर ढुलावतों का गुड़ा के पास अरावली की खूबसूरत पहाडियो में स्थित है। यहां जाने के लिए लगभग 4 किमी तक पैदल चलना पड़ता है। यह गुफा एकदम छद्म परिवेश में स्थित है...

आदि कैलाश ॐ पर्वत यात्रा 2024

  आदि कैलाश और ॐ पर्वत उत्तराखण्ड के पिथोरागढ़ जिले में भारत नेपाल और तिब्बत बॉर्डर पर स्थित है. आदि कैलाश छोटा कैलाश नाम से भी जाना जाता है, यह पंच कैलाश में से एक है. दोनो ही पर्वतो का हिंदू धर्म में काफी महत्व है. इस यात्रा को करने के लिए हर साल भारत के अलग अलग जगहों से बहुत सारे श्रद्धालु आते है. कुल समय: हल्द्वानी/ काठगोदाम से 8 दिन 7 रात. कार्यक्रम की तारीख:  यात्रा प्रेमी ग्रुप के सदस्यों के लिए इस वर्ष मई जून और सितंबर अक्टूबर के महीने में कुल 4 ग्रुप कराएंगे, हर ग्रुप में अधिकतम 22 सदस्य आ पाएंगे,आप अपनी सहूलियत के हिसाब से किसी भी ग्रुप में आ सकते है. पहला ग्रुप  20 मई से 27 मई. दूसरा ग्रुप 10 जून से 17 जून. तीसरा ग्रुप 25 सितम्बर से 2 अक्टूबर. चौथा ग्रुप 7 अक्टूबर से 14 अक्टूबर. पिक अप प्वाइंट: हल्द्वानी/काठगोदाम  ड्रॉप प्वाइंट: हल्द्वानी/काठगोदाम सफर का साधन: 4 दिन टेम्पो ट्रैवलर, और 4 दिन बोलेरो कैंपर 4*4, इसुजु, और स्कॉर्पियो. पूरी यात्रा में घूमने के डेस्टीनेशन और देखने लायक जगहें:  भीमताल, कैंची धाम, चितई गोलू देवता मंदिर, जागेश्वर धाम, भारत-नेपा...

રાજગીર બિહાર કાંચનો પુલ , નાલંદા

  जिस वक्त खड़ा था मैं, ग्लास ब्रिज (राजगीर) पे उस वक्त मैं एक अलग अनुभव से गुजर रहा था, एक सुंदर बेहतर एहसास था मेरे लिए। क्या है इसकी खासियत - 200 फीट ऊंचा, 85 फीट लंबा और 6 फीट चौड़ा है यह ग्लास ब्रिज। - एक बार में 40 पर्यटक जा सकते हैं। - चीन के हांगझोऊ प्रोविंस की तर्ज पर बना है। - देश का दूसरा और पूर्वोतर भारत का पहला ग्लास ब्रिज है। - गौतम बुद्ध की विरासत वाली राजगीर नगरी में स्थित है। - राजगीर अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थली है। - ग्लास ब्रिज के साथ आप नेचर सफारी, रोप-वे साइकलिंग भी कर सकते हैं। राजगीर में मुझे यह अच्छा लगा कि यहां सब कुछ सस्ता है सारे एक्टिविटी करने के बावजूद भी बहुत कम पैसे खर्च होते हैं। कुछ टूरिस्ट प्लेस पर तो लूट मची हुई है, गुंडागर्दी भी देखने को मिलता, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं है राजगीर में। राजगीर घूमने का सबसे बेस्ट टाइम है, नवंबर से अप्रैल के बीच।  राजगीर के और बेहतर जानकारी के लिए कृपया यूट्यूब पर सर्च करें हजारों वीडियो उपलब्ध हैं इसके लिए। शांति स्तूप.जरासंध का अखाड़ा ..रोपवे सबसे पुराना एक सीट वाला जो देवानंद k फिल्म में है..और सबसे महत्वपूर्ण ...

જબલપુર અમરકંટક નર્મદા

   दिनांक 14 /12 /2023 को हम नर्मदा एक्सप्रेस से रात 11:00 बजे जबलपुर पहुंचे चुकी रात अधिक हो गई थी अतः हमने अपने होटल पहुंचने के लिए एक ऑटो बुक किया जो ₹200 में हमें हमारे होटल सत्यम रेजिडेंसी प्रेम नगर पोस्ट ऑफिस के पास तक ले गईl होटल बहुत खूबसूरत था और आसपास बहुत शांति थी होटल वाले से हमने बारगेनिंग करके तीन दिन के लिए₹2500 में डबल बेड नान इसी रूम बुक किया वहां पहुंचने से पहले हमने फोन करके पूछ लिया था होटल वाले द्वारा रूम खाली होने की जानकारी दी गई थी (होटल का नंबर 0761 470 1100) दिनांक 15 /12/2023 से हमने अपनी ट्रिप चालू की हम सुबह 9:00 बजे प्रेमनगर पोस्ट ऑफिस बस स्टॉप तक लगभग डेढ़ सौ मीटर पैदल गए वहां से हमें भेड़ाघाट के लिए मेट्रो बस मिल गई जिसने हमें₹35 प्रति यात्री के हिसाब से भेड़ाघाट धुआंधार जलप्रपात के पास पहुंचा दिया, धुआंधार जलप्रपात में हमने लगभग 3 घंटा बिताया, वहां से ऊपर जाकर रोपवे पॉइंट पर जाकर प्रति व्यक्ति 145 रूपए के दर से रोपवे का टिकट लिया तथा धुआंधार जलप्रपात के दूसरी ओर जाकर लगभग दो घंटा बिताया वापस आकर हमने पंचवटी नौका विहार के लिए ऑटो लिया जिसने हमें...

अंडमान पोर्ट ब्लेयर Tour અંદામાન નિકોબાર ટુર

 अंडमान की ट्रिप नॉर्थ इंडिया से स्टार्ट करने पर बजट ट्रैवलर के लिए थोड़ा महंगी पड़ती है । इसको कुछ सस्ता करने का जुगाड़ आप लोगों को बताता हूँ । अंडमान जाने के लिए आपको या तो हवाई जहाज से जाना होगा या फिर पानी वाले जहाज से । पानी वाला जहाज लेने के लिए भी आपको कलकत्ता या फिर साउथ इंडिया के किसी समुद्री पोर्ट से पानी वाला जहाज लेना पड़ेगा। उसमे भी सुना है 2 या ढाई दिन लगते हैं । तो पानी वाले जहाज से जाना काफी बोरिंग काम है । ऊपर से रास्ते मे नेटवर्क भी नहीं होता तो फोन चला कर टाइम पास भी नहीं हो सकेगा। इसलिए हवाई जहाज ही बेस्ट है । दिल्ली से कितना भी जुगाड़ लगाओ पोर्ट ब्लेयर लैंड करने की ही फ्लाइट ही एक तरफ से 11-12 हजार की पड़ जाती है, किसी क्रेडिट कार्ड के डिस्काउंट से ये 10 हजार मे भी जुगाड़ हो सकती है लेकिन आना जाना यदि 20 का भी हुआ तो भी बजट ट्रैवलर के लिए महंगा ही है । इसका तोड़ है आप कलकत्ता तक ट्रेन की स्लीपर क्लास मे ट्रैवल कर लीजिये। वहाँ से पोर्ट ब्लेयर की हवाई जवाज की टिकट 5-6 हजार की रेंज मे आ सकती है । और ट्रेन की स्लीपर क्लास कोलकाता तक 700-800 तक की पड़ जानी चाहिए। तो हवाई टिक...

AAdi Yogi ईशा योग केन्द्र આદિ યોગી

  हम दोनों 4-5 दिन ईशा योग केन्द्र में रहने के बाद 4 फ़रवरी को मुन्नार आ गये। कल 6 फ़रवरी को मदुरै जायेंगे। ईशा केन्द्र के बारे में कुछ जानकारी साझा करना चाहता हूं शायद किसी के काम आ जाए।  जो घुम्मकड़ कुछ दिन शान्त और सादा जीवन जीना चाहते हैं उनके लिए यह उपयुक्त स्थान कोयम्बतूर से 30 किलोमीटर है। यहां रहने के लिए आनलाइन बुकिंग होती है। प्रतिदिन 990रु या अधिक के हिसाब से बहुत सुंदर बड़ा रुम मिल जाता है। सुबह शाम 2 बार संतुलित और पौष्टिक भोजन मिलता है। आप यदि चाहें तो केन्द्र में ही बहुत अच्छी कैंटीन भी है। केन्द्र के बाहर भी कुछ बहुत अच्छे भोजनालय है।  आप चाहें तो 2100रू या   अधिक की सहयोग राशि भी केन्द्र में जमा करा सकते हैं। यात्री 7 दिन से अधिक के लिए रुम नहीं ले सकते। जो लोग आध्यात्मिक या यौगिक विकास और अध्यन चाहते हैं उनके लिए लम्बे प्रवास अन्य सुविधाओं और नियमों के साथ सम्भव है।  ईशा योग केन्द्र 3-4 किलोमीटर में फैला हुआ है। अन्दर आने जाने घूमने के लिए फ्री बस बैटरी ट्राली या बैलगाड़ी का इंतजाम है। करीब 500 पीले रंग की साइकल हैं जो आप कहीं से उठाकर कही...

કાશીમાં જોવાલાયક સ્થળો વિશે

  કાશી વિશે કહેવત છે કે સુરતનું જમણ અને કાશીનું મરણ.. ✍️ બનારસ જે કાશી અને વારાણસી તરીકે પણ ઓળખાય છે. આ ભારતનું સૌથી જૂનું શહેર છે. બનારસમાં કુલ 84 ઘાટ છે. જેમાંથી સૌથી મોટો ઘાટ મણિકર્ણિકા ઘાટ છે. ✍️  મણિકર્ણિકા ઘાટ  શિવનો ઘાટ, અહીં જેમનો અંતિમ સંસ્કાર કરવામાં આવે છે તેઓને મોક્ષ મળે છે. રોજના 200 થી 300 અંતિમ સંસ્કાર અહી  થાય છે. મણિકર્ણિકા ઘાટ માત્ર ભારતમાં જ નહીં પરંતુ વિશ્વનો એકમાત્ર એવો ઘાટ છે. જ્યાં હંમેશા ચિતા સળગતી રહે છે. દુનિયામાં ભલે ગમે તે થતું રહે પરંતુ મણિકર્ણિકા ઘાટ પર 24 કલાક કોઈને કોઈ જગ્યાએ ચિતા સળગતી રહે છે. મણિકર્ણિકા ઘાટ પર હંમેશા ચિતા સળગવાને લઈને ઘણી વાર્તાઓ પ્રચલિત છે. એક પૌરાણિક કથા અનુસાર, એવું કહેવાય છે કે મણિકર્ણિકા ઘાટને માતા પાર્વતીએ શ્રાપ આપ્યો હતો કે અહીંની અગ્નિ ક્યારેય બુઝાશે નહીં. કથા અનુસાર હજારો વર્ષો સુધી ભગવાન વિષ્ણુએ કાશીના પવિત્ર શહેર માટે ભગવાન શિવને પ્રાર્થના કરી હતી. કે વિશ્વ માં કંઈપણ થાય આ નગર નાશ કરવામાં ના આવે. આ બાબત કલ્કી ફિલ્મમાં પણ છે. તેમાં જે નગર બતાવવામાં આવ્યું છે તે કાશી છે. તે મુજબ ભગવાન વિષ્ણુની સાચી પ્રાર્થના...

Naheru Kund Manali

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  नेहरू कुंड  का पानी पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के लिए दिल्ली तक ले जाया जाता था । नेहरू के नाम पर ही बाद में इस कुंड का नाम भी नेहरू कुंड पड़ गया ।  दरअसल बात वर्ष 1958 की है जब पहली बार प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू देवभूमि हिमाचल के मनाली दौरे पर आए। घूमते घूमते वे मनाली से पांच किलोमीटर दूर वह इस कुंड के पास पहुंचे और उन्होंने ग्लेश्यिरों से निकल रहे इस कुंड का पानी पीया | स्‍थानीय लोगों ने उन्हें बताया कि ये पानी सबसे साफ तो है ही, लेकिन कई हिमालय की दुर्लभ जड़ी बूटियों का रस भी इसमें घुला है जो कई बीमारियों को रोकता है । इसी दौरे के बाद मनाली की पहचान पर्यटक स्‍थल के तौर पर पहली बार देश ‌दुनिया को हुई थी। स्‍थानीय लोगों का कहना है कि इसके बाद जब भी प्रधानमंत्री मनाली दौरे पर आते थे वह इस कुंड का पानी जरूर पीते थे। ब्यास नदी के किनारे स्थित इस कुंड के आसपास का नजारा भी रमणीय है । इस कुंड के लिए पानी भृगु कुंड से आता है। यह रोहतांग के रास्ते में स्थित है। इसके लिए पानी ग्लेशियरों से मिलता है।  रोहतांग जाने वाले रास्ते में पाए जाने वाले चश्मो और कुंडों का ...

ચિત્રકૂટ ધામ જોવાલાયક સ્થળો Chitrakoot

  મંદાકિની નદીના કિનારે વસેલું આ શહેર રામાયણ કાળને યાદ અપાવે. વનવાસકાળના 14 માંથી સૌથી વધુ વર્ષ રામ, સીતા અને લક્ષ્મણે ચિત્રકૂટની પાવની ધરા પર જ વિતાવ્યા હતા. રામ વનવાસ માટે પહેલા ચિત્રકૂટ આવ્યા હતા. એવું માનવામાં આવે છે કે ભગવાન રામ અહીં 11 વર્ષ, 6 મહિના, 27 દિવસ સુધી રહ્યા હતા.  ભરત રામને મનાવવા માટે ચિત્રકૂટ જાય છે. તેઓ જ્યાં મળ્યા તે સ્થળ ભરત મિલાપ મંદિર તરીકે ઓળખાય છે. ચિત્રકૂટ અયોધ્યાથી બહુ દૂર નથી. રામને અયોધ્યા પાછા લઈ જવા સારુ ભરત અહીં રામને મળ્યા હતા. તે ચિત્રકૂટના કામદગિરી પર્વતના પરિક્રમા માર્ગ પર આવેલ છે. પરિક્રમાનો રૂટ 5 કિલોમીટર લાંબો છે. ખોહી ગામની પહેલાં ભરત મિલાપ મંદિર આવેલું છે. કામદગિરિ પર્વત પરિક્રમા અહીં ભગવાન શ્રી રામ પોતાના વનવાસનો સૌથી વધું સમય પસાર કરતાં હતાં. 5 કિમી નો એરિયા છે..જેની પરિક્રમા કરવામાં આવે છે. રામ ઘાટ આ નદીમાં ભગવાન શ્રીરામ સવારે સ્નાન કરતા હતાં. એટલે આ ઘાટને રામ ઘાટ કહેવાય છે.  હનુમાનધારા..  રામ ઘાટ થી 3 કિમી.. દૂર જ્યાં રહેવાથી હનુમાનનો શરીરદાહ શાન્ત થયો હતો તે સ્થળ. હનુમાનધારા પહાડી પર સીતારસોઈ મંદિર આવેલું છે. આ એ જ સ્થાન...

ઉત્તર વાહિની નર્મદા મૈયાની પરિક્રમા

  વડોદરા આવી ત્યાંથી રાજપીપલા વાયા કેવડીયા ની બસ માં તિલકવાડા ઉતરી ત્યાં થી પરિક્રમાં પ્રારંભ કરી શકાયઃ  અથવા  રાજપીપલા જઈ ત્યાંથી રામપુરા જવુ ત્યાંથી પણ પ્રારંભ કરી શકાય. પરિક્રમા રૂટ 2 જો મણિનાગેશ્વર થી પરિક્રમા  શરૂ કરીને રેવા વનપ્રસ્થનગર, મુનિ આશ્રમ, રેંગણ ઘાટ ક્રોસ કરીને રામપુરા રૂટ થઈને પરત તિલકવાડા આવવાનું રહેશે. વર્ષોથી મનમાં થયા કરતું હતું કે માં નર્મદાની પરિક્રમા કરૂ પરંતુ સમય અને સંજોગો અનુકૂળ થતા નહોતા કોઈકે સાચું જ કહ્યું છે કે પરિક્રમા એ જ કરી શકે જેને માં પોતાના તીરે  બોલાવે. ? આમ તો હું સંસારમાં રહેતો અલગારી જીવ થોડામાં ઘણું માની મસ્તીથી જીવવું એ જ અભિલાષા અને સિદ્ધાંત હમણાં હમણાં ઘણી વાર ગરવા ગિરનારની લીલી પરિક્રમા કરી અને મા અંબા ના ગબ્બરની 52 શક્તિપીઠ ની પરિક્રમા પણ કરી સાથે સાથે કોઈપણ ધાર્મિક સ્થાન ના દર્શન કરવા મને ખૂબ ગમે જેથી ઘણીવાર કાઠીયાવાડ માં રહેલા આપણા ધાર્મિક અને આધ્યાત્મિક સ્થાનોની મુલાકાત લેવાનું ગમે મારો જન્મ કાંકરેજ તાલુકાના નાનકડા ગામ કસલપુરામાં થયો છે અને મારા ઘરથી બનાસ નદી થોડા જ અંતરે વહે છે અમે નાના હતા ત્યારે એમાં બારેમાસ પ...

Meghalaya Shilong મેઘાલય અને શિલોંગ

 शिलोंग घूमने का अच्छा सुरक्षित व किफायती तरीका हे,मेघालय टूरिज्म की बसे,जिनकी ऑनलाइन बुकिंग होती हे,,,मुझसे नही हो पाई तो मैने उनके ऑफिस जाकर ही टिकिट ली,कुल 3 टूर बस करवाती हे, इक चेरापूंजी, इक डावकी विलेज, इक उमियांग लेक,,तीन दिन में कवर हो जाता हे, सुबह 8,30 बस रवाना होती हे,और रात 6 तक वापस,,,बस का इक दिन का किराया,,चेरापूंजी का 500 रू,,, दावकी विलेज का 700 रू,और उमियाग लेक का 350 रू हे,बस रास्ते के सभी टूरिस्ट प्वाइंट घुमाती हे,,और उसमे गाइड भी रहता है,जो सबके बारे में बताता भी है।चेरापूंजी ट्रीप में,सेवन सिस्टर ,नोकाईफाल सब कुछ कवर हो जाता हे। बस ,,, पोलो नामक जगह ,जहां मेघालय टूरिज्म का ऑफिस भी हे वहां से मिलती है,आप कही भी रुकें हो वहां से शेयर टैक्सी मिल जाती हे,पोलो के लिए। MEGHALAYA TOURISM DEVELOPMENT CORPORATION LIMITED: SHILLONG (A GOVT. OF MEGHALAYA UNDERTAKING) TOURIST INFORMATION CENTRE Bus 🚌  Contact No:  8257923906 8974579752 8257961043 Landline:  (0364) 2226220 Website

કેરલ KERALA केरल

 यात्राएँ जीवन को सरल और व्यापक बनाती हैं!अक्सर लोग सोचते हैं कि मंहगी यात्राएं करके ही पर्यटन किया जा सकता है या फिर बहुत पैसे होने पर ही पर्यटन संभव है! पर ऐसी बात नहीं है!बजट यात्राएं करके भी आप अपने घूमने के शौक को पूरा कर सकते हैं!बस!आपको अपने कम्फर्ट जोन से बाहर निकलना होगा! तो चलिए, ऐसी ही एक बजट यात्रा के बारे आपको बताती हूं! "मुन्नार"केरल का एक अत्यंत प्रसिद्ध और पसंदीदा हिल स्टेशन है!यहां जाने के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन एर्नाकुलम या फिर अलुवा है !यहां स्टेशन के सामने ही KSRTC की बस लगी रहती है !पहली बस 5:20 बजे सुबह में छुटती है !यह लगभग 4घंंटे में आपको मुन्नार पहुंचा देती हैं !बस का किराया  ₹176  है जिसमें आप आसानी से एर्नाकुलम से मुन्नार पहुंच सकते हैं! सोलो ट्रैवलरों के लिए एक अच्छी खबर यह भी है कि केरल टूरिज्म की KSRTC ने अपनी पुरानी बसों को थोड़ा तब्दील करके रात्रि विश्राम के लिए स्लीपर बस में बदल दिया है ,जहां आप सिर्फ ₹220 देेकर रात्रि विश्राम कर सकते हैं!इसके अलावे बहुत सारे बजट होटल भी आपको 1000-2000 रुपये में मिल जायेंगे!         ...

બદ્રીનાથ Badrinath

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  બદ્રીનાથ ભારતના ચારધામમાંનું એક પવિત્ર તીર્થસ્થળ છે, જે ઉત્તરાખંડ રાજ્યના હિમાલય પર્વતમાળામાં અલકનંદા નદીના કિનારે આવેલું છે. આ સ્થળ મુખ્યત્વે ભગવાન વિષ્ણુના બદ્રીનારાયણ સ્વરૂપના મંદિર માટે જાણીતું છે. બદ્રીનાથના મુખ્ય દર્શનીય સ્થળોની વિસ્તૃત માહિતી નીચે મુજબ છે: શ્રી બદ્રીનાથ મંદિર (શ્રી બદ્રીનારાયણ ધામ): આ બદ્રીનાથનું કેન્દ્ર છે. તે ભગવાન વિષ્ણુના બદ્રીનારાયણ સ્વરૂપને સમર્પિત છે. આદિ શંકરાચાર્યએ ૮મી સદીમાં આ મંદિરની સ્થાપના કરી હોવાનું મનાય છે.  મંદિરમાં ભગવાન વિષ્ણુની ૧ મીટર ઊંચી કાળા પથ્થરની મૂર્તિ છે, જે યોગાસન મુદ્રામાં બિરાજમાન છે અને વિષ્ણુની ૮ સ્વયંભૂ મૂર્તિઓમાંની એક માનવામાં આવે છે. મંદિરની સ્થાપત્ય શૈલી ઉત્તર ભારતીય છે. શિયાળામાં ભારે હિમવર્ષાને કારણે મંદિરના કપાટ લગભગ ૬ મહિના (મે થી ઓક્ટોબર) માટે જ ખુલ્લા રહે છે.   તપ્ત કુંડ:  બદ્રીનાથ મંદિરથી થોડી જ દૂર અલકનંદા નદીના કિનારે આવેલો આ એક ગરમ પાણીનો ઝરો (Thermal Spring) છે. કુંડમાં પાણીનું તાપમાન આશરે 45 સેલ્સિયસ જેટલું હોય છે. ભક્તો બદ્રીનાથના દર્શન પહેલા આ પવિત્ર કુંડમાં સ્નાન કરે છે, જેનું પાણી ઔષધીય ગુ...